महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक, जानिए क्या है मामला?

महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक, जानिए क्या है मामला?

महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राजनितिक दलों और खासकर उद्धव ठाकरे की महा विकास अघाडी को महाराष्ट्र बंद पर इस आह्वान पर आगे बढ़ने पर रोक लगा दी है। महाराष्ट्र बंद कि इस प्रकिया में कांग्रेस और शरद पवार की अगुवाई वाली अपनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल है। इसमें महाराष्ट्र बंद का आवाहन इस लिए करना चाहते है कि जो एक स्कूल में दो-चार साल की लड़कियों के योन शोषण किया जा रहा है और महिलाओ के खिलाफ बढ़ते अपरादो के विरोद में बंद का आह्वान किया था लेकिन इस बात को बॉम्बे हाईकोर्ट ने नकार दिया और महाराष्ट्र बंद का आह्वान वापिस लेने की बात कही।

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महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने दो जनहित याचिकाओं में महाराष्ट्र बंद के इस आह्वान के बाद आदेश दिया कि ” अगले आदेश तक सभी संबंधित पक्षों को 24 अगस्त 2024 और अन्य तारीख को महाराष्ट्र बंद के आह्वान पर आगे बढ़ने से रोक लगा दिया जाता है।”

महाराष्ट्र बंद पर न्यायालय ने राज्य में, कांग्रेस , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(शरद पवार गुट) और शिवसेना(यूटीबी) को नोटिस जारी किया कि जिसका जवाब आपको 9 अक्टूबर को दिया जाना है। उन्होंने कहा कि राज्य को बी.जी. देशमुख मामले ,इ जारी होने वाले निर्देशों का सख्ती से पालन करने का भी निर्देश दिया है। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र बंद पर रोक लगा दी। इस सब याचिकाओं में एक कि ओर से पेश हुए अधिवक्ता गुणरतन सदावर्ते ने तर्क दिया है कि “राजनीति से प्रेरित था और इसमें जनकल्याण को भी नुकसान होगा।

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महाराष्ट्र बंद में बंद के खिलाफ दलील देते हुए यह याचिकाकर्ताओं कि ओर से कहा गया है कि बंद के कारण ,समाचार पत्र वितरण, दूद आपूर्ति और अस्पताल संचालन, मार्केट संचालन सहित आवश्यक सेवाओं में संभावित व्यवधान उत्पन्न होगा इसमें कोई रोक टोक नहीं होगी। इस महाराष्ट्र बंद में एक जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि “यदि यदि आपका इरादा दूध की आपूर्ति को रोकना और समाचार पत्र वितरण को बाधित करना और सभी को अस्पताल जाने और अन्य काम पर जाने से रोकना है।

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