हिंडनबर्ग-सेबी विवाद में डैनियल गेलट्रूड ने कहा:-सेबी अध्यक्ष को इस्तीफा दे देना चाहिए।

हिंडनबर्ग-सेबी विवाद में डैनियल गेलट्रूड ने कहा:-सेबी अध्यक्ष को इस्तीफा दे देना चाहिए।

हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट में यह कहा है पिछले कुछ दिन में उपजे विवाद में भारत सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा इसमें लगाए गया आरोप है कि सेबी प्रमुख धवल बुच और उनके बेटा माधबी पुरी बुच के पास अडानी परिवार से जुड़े विदेशी निवेश है। हिंडनबर्ग ने कहा है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियो का मानना है कि बुच और उनके पिता के खिलाफ आरोप “दुर्भावनापूर्ण और असत्य ” है, TOI ने रिपोर्ट अनुसार उन्होंने कहा है कि ये आरोप शार्ट सेलर को नियामक द्वारा दिए गए नोटिस के जबाब में लगाए गए है।

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हिंडनबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है कि बुच के पास मॉरीशस और बरमूडा स्थित ऑफशोर फंड में कुछ हिस्सेदारी थी। इन सभी फंड कहने के तोर पर गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी के द्वारा “वो उनका व्यापार करने और अडानी समूह के शेयरों को अत्यधिक मात्रा में पोजीसन हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। हिंडनबर्ग ने यह भी स्पस्ट किया है कि बुच ने 5 जून 2015 को सिंगापुर के IPE प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला था। हिंडनबर्ग ने अडानी समूह एक साथ मिल के विदेशों से धन निकालना चाहते थे।

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हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा कि एक अन्य अधिकारी ने भी कहा है कि,”नियामक ने खुद भी निवेशकों को सावधान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है,जहा भी इनको दवाब बढ़ता हुआ दिखाई देता था और बाजारों में समग्र कामकाज को बेहतर बनाने के लिए कई विनियामक कार्यवाई करते थे।” TOI के अनुसार, इस बड़े अधिकारी ने बताया कि सेबी ने हिंडनबर्ग द्वारा पहले लगाया गया आरोप कि अपनी जाँच के निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए थे”।

पिछले कुछ हफ्ते अमेरिका स्थित हिंडनबर्ग ने कहा है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड माधबी पुरी बुच की अडानी समूह के द्वारा गड़बड़ी में इस्तेमाल कि गयी थी जिसे आरोप की निंदा करते हुए कहा कि “ये सब दावे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निराधार किये गए है । हिंडनबर्ग ने अधिकारियों के धवल बुच और माधबी पुरी बुच इन दोनों बाप-बेटा के बयानों कि ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों एक निजी क्षेत्र में काम करते है लेकिन उन्होंने यह भी माना है कि नियामक ने व्यापक परामर्श प्रक्रिया का पालन करा है।

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